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राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया और साहिल लूथरा की आध्यात्मिक मुलाकात X पर हुई वायरल

  • 4 days ago
  • 2 min read

Nov 10, 2025


गुड़गांव ब्यूरो : पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया और विजयन त्रिशूल डिफेंस सॉल्यूशंस के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक साहिल लूथरा की हालिया आध्यात्मिक मुलाकात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर देशभर में चर्चा का विषय बन गई है। यह मुलाकात परम पूज्य दिव्यतपस्वी आचार्यदेव हंसरत्न सूरिश्वरजी महाराज जी के सान्निध्य में हुई, जो अपनी गहन तपस्या, अनुशासन और मानवता के प्रति सेवा भावना के लिए विख्यात हैं। इस मुलाकात की तस्वीरें और विचार सोशल मीडिया पर वायरल हो गए, खासतौर पर इस पोस्ट के साथ: जहाँ राजनीति बाँटती है, वहाँ आस्था जोड़ती है। राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया  और साहिल लूथरा के बीच एक सार्थक संवाद।

 

कुछ ही घंटों में यह पोस्ट X पर व्यापक रूप से साझा की जाने लगी। लोगों ने इसे शासन, उद्योग और अध्यात्म के दुर्लभ संगम के रूप में सराहा। कई उपयोगकर्ताओं ने लिखा कि “भारत की असली ताकत इसी समरसता में है जहाँ नेतृत्व न केवल प्रगति की बात करता है बल्कि मूल्यों और संस्कृति से भी जुड़ा रहता है। इस अवसर पर हंसरत्न सूरिश्वरजी महाराज जी, जो इन दिनों अपने आठवें 180-दिवसीय उपवास और ध्यान साधना के दौर में हैं, ने श्रद्धा, आत्मसंयम और नैतिकता पर आधारित जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला। उनका राष्ट्रीय अभियान ‘सेव कल्चर, सेव फैमिली, बिल्ड नेशन’ भारतीय समाज में नैतिक पुनर्जागरण का आह्वान कर रहा है।

 

 साहिल लूथरा ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा “ऐसे संत पुरुषों के सान्निध्य में होना वास्तव में आत्मचिंतन का अवसर था। इसने मुझे याद दिलाया कि सच्चा नेतृत्व, चाहे वह शासन में हो, नवाचार में या अध्यात्म में, तभी सार्थक होता है जब उसमें करुणा और ईमानदारी की भावना हो। राज्यपाल गुलाबचंद कटारियाने भी  महाराजजी की सामाजिक और आध्यात्मिक प्रतिबद्धता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास देश में सद्भाव, एकता और नैतिक जागरूकता को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। X (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुलाकात की चर्चा लगातार बढ़ रही है। लोग इसे एक ऐसे क्षण के रूप में देख रहे हैं जिसने शासन और अध्यात्म के बीच सेतु का काम किया। डिजिटल युग में जहाँ अक्सर सोशल मीडिया राजनीतिक मतभेदों से विभाजित दिखता है, वहीं यह पोस्ट एक नई उम्मीद लेकर आई  कि जब आस्था नेतृत्व से मिलती है, तब राजनीति नहीं, बल्कि एकता जन्म लेती है।



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